हाई ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल करती है आयुर्वेदिक जड़ी बूटी

High blood pressure

उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) सबसे आम स्वास्थ्य की स्थिति में पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित करता है। ब्लड प्रेशेर की रीडिंग यदि 120/80mm ऑफ़ Hg है तो इसका मतलब यह है की आपका रक्तचाप उच्च रक्तचाप के अंदर है, अगर आप के ब्लड प्रेशर की रीडिंग इससे उपर जाती है तो आपको ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए दवाईयां लेनी पड़ती है। लेकिन कुछ आयुर्वेदि औषधियां भी हैं जिनको रेगुलर लेने से आपका ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और ज्यादा होने की संभावनाएं भी कम हो जाती हैं। हाल ही में कुछ शोधों में यह पता किया गया है कि आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां उच्च रक्त चाप को नियंत्रित करने में बहुत प्रभावी सिद्ध हुई हैं। जिनके बारे में हम आपको यहाँ बताने जा रहें हैं:

जटामांसी (Jatamanasi)
जटामांसी जड़ी बूटी एंटी ओक्सिडेंट से भरपूर होती है, जो शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है। जटामांसी रक्त बहिकाओं में पट्टिका निर्माण पर रोक लगाती है साथ ही पट्टिका को रक्त वाहिकाओं से बाहर निकालने में मदद करती है जिससे ह्रदय पर दबाब नहीं पड़ता और हमारे शरीरी का रक्त चाप नियंत्रित रहता है। जटामांसी बाजार में आयुर्वेदिक स्टोर, मेडिकल स्टोरों पर पाउडर के रूप में आसानी से मिल जाती है। प्रतिदिन रोज सुबह खाली पेट दो चम्मच इसका सेवन करने से उच्च रक्त चाप नियंत्रित रहता है।

अर्जुन (Arjuna)
अर्जुन पेड़ की छाल मनुष्यों में उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में अपनी भूमिका के लिए प्रसिद्ध है। यह रक्त वाहिकाओं में पट्टिका के संचय को कम कर देता है, जिससे दिल पर दबाव कम पड़ता है। अर्जुन पेड़ की छाल का पाउडर भी बाजार में आसानी से मिल जाता है या किसी भी आयुर्वेदि स्टोर से आप इसे ले सकते हैं, और अच्छे परिणाम के लिए पानी के साथ प्रतिदिन प्रातः काल एक चम्मच अर्जुन पाउडर का सेवन करने से उच्च रक्त चाप नियंत्रित रहता है।

अश्वगंधा (Ashwagandha)
उच्च रक्त चाप का मुख्य कारण तनाव होता है जिन व्यक्तियों को ज्यादा तनाव होता है या जो व्यक्ति ज्यादा किसी विषय में सोचते रहते हैं वे अधिकतर उच्च रक्त चाप के शिकरा हो जाते हैं। अश्वगंधा Adaptogens, कि मदद से तनाव और चिंता से निपटने का एक समृद्ध स्रोत है। यह शरीर की प्रतिरक्षा भी बढ़ा देता है और मन पर एक शांत प्रभाव डालता है। अश्वगंधा दवाइयों की दुकान पर टेबलेट के रूप में, पाउडर के रूप में और आयुर्वेदिक दवा की दुकानों से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। एक गिलास पानी में अश्वगंधा पाउडर के दो बड़े चम्मच मिक्स करके हर सुबह खाली पेट पियें। जल्दी ही इसका असर आपको नज़र आने लगेगा।

त्रिफला (Triphala)
एक और आश्चर्यजनक आयुर्वेदिक दवा है त्रिफला जिसके सेवन से हमें अनगिनत स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते है। त्रिफला का चूर्ण दो बड़े चम्मच पानी के साथ हर सुबह लेने से बीपी के स्तर को सामान्य बनाए रखने में बड़ा ही लाभकारी है। यह नसों और धमनियों में कोलेस्ट्रॉल और पट्टिका संचय को कम करता है। अपने विरोधी भड़काऊ गुणों के कारण रक्त वाहिकाओं से तनाव को कम करता है, साथ ही पेट में होने वाली सभी बिमारियों से छुटकारा दिलाता हैं। इसके प्रतिदिन सेवन करने से पेट में कब्ज, गैस, मरोड़, अफरा इत्यादि नहीं होते हैं।

अमला (Amla)
आंवला आयुर्वेद में एक बहुत सी चमत्कारी औषधियों में से एक है। आंवले के अपने बहुत सारे फायदे होते हैं। आंवले के सेवन से उच्च रक्त चाप, कोलेस्ट्रोल, बालों का झड़ना, त्वचा सम्बन्धी रोंगों से छुटकारा पाया जा सकता है। आंवले का पाउडर बाजार में आयुर्वेदिक दुकान पर आसानी से मिल जाता है। इसका सेवन प्रतिदिन सुबह खाली पेट दो चम्मच पानी के साथ, या इसका रस शहद में मिलकर लिया जा सकता है।

लहसुन (Garlic)
लहसुन की एक कच्ची कली रोज सुबह खाली पेट खाने से या उच्च रक्त चाप पर रोक लगाने के लिए सबसे आसान तरीका है। अध्ययनों से पता चलता है कि लहसुन के औषधीय गुण रक्त चाप को कम करने में विशेष रूप से शक्तिशाली हैं। और यह रक्त में से कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी कम कर देता है।

अजवायन (Ajwain)
भोजन करने के बाद माउथ फ्रेशनर लेना भारतीयों में प्रचलन है। यदि हम भोजन करने के बाद एक चुटकी अजवायन का सेवन करें तो इससे हमें आश्चर्यजनक लाभ होंगे, जैसे “आम के आम गुठलियों के दाम” यह मुंह में सुगंध के साथ और भी फायदेमंद होती है। यह तनाव हार्मोन को कम करने में मदद करती है, रक्त वाहिकायों से कोलेस्ट्रोल को कम करती है जिससे ह्रदय पर कम दबाब पड़ता है रक्त चाप नियंत्रित रहता है। खाने के बाद एक चुटकी अजवायन लेने से भोजन को पचाने में मदद होती है ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल में रहता है।

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